*मुर्दे का इलाज करने वाले देवांता अस्पताल के साइलेंट पार्टनर नटवरलाल नेता ने की आम सभा..!**पहले पत्रकार वार्ता कर देवांता के खिलाफ छापने वाले पत्रकारों को धमकाया,फिर लगाए अनर्गल आरोप*

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*शहडोल* : शहडोल जिले में पुलिस अधीक्षक अवधेश गोस्वामी की पदस्थापना के बाद जब शहडोल में रामराज सा माहौल हुआ तो इस रामराज की फिजा बिगाड़ने की कमान एक दल बदलू नटवरलाल नेता ने संभाली, जी हां हम बात कर रहे हैं उसी नेता की जिसने एक सामाजिक अपराध मुर्दे को वेंटिलेटर में रखकर गरीब किसान से पैसा वसूलने वाले देवांता अस्पताल के पक्ष में पत्रकारों को धमकाया था। लेकिन जिले में रामराज था पत्रकार सही थे और मानवता के साथ थे पत्रकार देवांता अस्पताल की कमियों और मामले को दर परत खोलते रहे नतीजा यह हुआ कि जांच कमेटी जिसका नेतृत्व शहडोल के एक लोकप्रिय आईएएस कर रहे थे द्वारा अस्पताल का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया। अब नेताजी ने पत्रकारों को धमकाया था पत्रकारों ने फिर भी नहीं सुनी खबर छपते रहे प्रशासन कार्यवाही करता रहा दोनों फर्जी डॉक्टरों पर मुकदमा दर्ज हो ही चुका था, कुल मिलाकर नेताजी की एक ना चली, तो नेता जी ने देवांता के सामाजिक अपराध के खिलाफ समाचार छापने वालो को ही निशाना बनाना शुरू किया और नतीजा भरे मंच में बिना किसी प्रमाण उलजरूर आरोप…मढ़ दिए ।

*नेताजी कितने पाक-साफ..*

नेता जी कांग्रेस में थे पार्षद रहकर कई गुल खिलाये लाखो तक तो ठीक था लेकिन फिर नेता जी ने जिले के एक और नटवरलाल नेता का सहारा लिया और दोनों मिलकर शहडोल संभाग के लिए विकाश की धारा प्रवाहित करने आई कंपनी के खिलाफ पहले तो मोर्चा खोला जब बात नहीं बनी तो कंपनी को स्थानीय लोगों की जमीन हड़प कर बेचने लगे जी हां किसानों से औने पौने दाम पर जमीन खरीदना और जमीन ना बेचने वाले किसान की जमीन एन केन प्रकारेण हड़प लेना और कई गुना दाम पर कंपनी को भेज देना। धीरे-धीरे समय यूं ही चलता रहा कांग्रेस का साथ छोड़ कर निर्दलीय चुनाव लड़े। सुहागपुर पहुंचकर व्यक्ति विशेष समुदाय को आहत किया, चुनाव में हार के बाद तथाकथित कांग्रेसी नेता जिसके साथ जमीन हड़पने का काम चलता था उसी के साथ पार्टनरशिप में अस्पताल में फंडिंग कर डाली। और अस्पताल में शुरू हुआ मौत का सौदा नेताजी और कुछ दिनों के लिए जिला अध्यक्ष का सुख भोगने वाले नेता जी ने फर्जी डॉक्टरों को मानो तथास्तु कह लूट लो शहर को का आशीर्वाद दे दिया। और हर अपराध को पर्दे के पीछे रहकर छुपाते रहे।

*अब नेताजी की कमाई का राज….*
नेताजी जो खुद को पाक साफ और आम आदमी बता रहे हैं यह एक लंबे अरसे से शासकीय कर्मचारियों को आरटीआई लगाकर परेशान करते हैं। अनूपपुर के ब्लैक मेलिंग केस से इनके और उनके चहेतों को 5 करोड़ रुपए वीडियो के बदले मिले। तो नेता जी ने अपना खुद का क्रेशर खोल लिया और उसे भी बाद में नियम विरुद्ध ढंग से बेच डाला जिसमें नेताजी 420 के आरोपी भी बन सकते हैं। वर्तमान में कमाई स्रोत मानवता को शर्मसार करने वाला अस्पताल था जिसमें नेताजी साइलेंट पार्टनर थे, वह दुकान तो पत्रकारों ने बंद करा दी, टाल में जुंआ चलता था उसकी नाल हर महीने डेढ़ दो लाख आ जाती थी उसे पुलिस अधीक्षक के भय से बंद करना पड़ा। अब पत्रकार भी बढ़ गए खादी ओढ़ कर आरटीआई का धंधा भी नही चल रहा तो नेता जी ने पत्रकार विरोधी अवैध गतिविधियों को अंजाम देने वालों को एकत्र किया उनसे फंडिंग ली और आम सभा कर मोर्चा खोल दिया। शहर के माने जाने सटोरिया क्रांति जिस पर पुलिस ने हाल ही में कार्यवाही की थी उसने नायडू को बोलकर गांधी चौक में टेंट लगवाया और नाला में कब्जा कर बिल्डिंग बनाने वाले अवैध कालोनाइजर अपने मजदूर दर्शक बनाकर मंच के सामने बैठाए। शालबोरर,तथाकथित पटवारी की मदद से रेवन्यू के गायब हुए दस्तावेज एवं रिलायंस से ग्रामीणों की आड़ में 25- 25 लाख की काली कमाई का हिसाब अभी शेष ।

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