*प्राचार्य बिना अपमानित किये अभिभावकों के सवालों का दें जवाब — मनोज द्विवेदी* *आज से फिर खुले विद्यालय– कोरोना संक्रमण से बचाव के नियमों का हो पालन*

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(मनीष शुक्ला)

*अनूपपुर / कोरोना की दूसरी लहर अभी समाप्त नहीं हुई है और तीसरी लहर की आशंका के बीच आज से विद्यालय बच्चों के लिये खोल दिये गये हैं। अभिभावकों की सहमति से नियम- शर्तों के साथ विभिन्न कक्षाओं के छात्र – छात्राओं ने आज से विद्यालय जाना शुरु कर दिया है‌ । विद्यालयों में कक्षा और उसके बाहर कोरोना संक्रमण से बचाव और व्यवस्था से जुडे प्रश्नों पर केन्द्रीय विद्यालय अनूपपुर की प्राचार्य सीधा जवाब ना देकर आए दिन झुंझलाती देखी जा रही हैं। वर्चुअल बैठक में भी कुछ अभिभावकों से उन्होंने टेढे लहजे में बात की ‌‌। ऐसी शिकायतें सामने आने पर भाजपा नेता मनोज द्विवेदी ने जिले के सभी सम्मानित प्राचार्यों और विद्यालय प्रबंधन से इस आशय की अपील की है कि दो – दो लाकडाउन के बाद प्रत्येक अभिभावक और स्वयं विद्यालय परिवार तमाम समस्याओं से दो – चार हुआ है। लोग अभी भी बच्चों को विद्यालय भेजने से कतरा रहे हैं। ऐसे में यह जरुरी है कि विद्यालय प्रबंधन अभिभावकों की चिंता और उनकी आशंका पर उन्हे समुचित सही तरीके से निदानात्मक जवाब दे कर संतुष्ट करें। विद्यालय कुशल ढंग से संचालित हों यह सभी चाहते हैं ‌। लेकिन यह भी आवश्यक है कि संक्रमण काल में कोई चूक व्यवस्था को लेकर विद्यालय प्रबंधन और प्राचार्य ना करें।*
2020 और फिर 2021 में कोविड संक्रमण की महामारी के कारण लगे दो – दो लाकडाउन के बाद अन्तत: आज 1 सितंबर 2021 से विद्यालयों में कक्षाएं लगना शुरु हो गयीं। भारत ज्योति विद्यालय के कक्षा 9 में पढने वाले शौर्य जैसे तमाम छात्र – छात्राओं की स्कूलों से दूरी जीवन रक्षा के लिये बहुत आवश्यक मानी गयी। सरकार ने अपने स्तर पर लोगों की सुरक्षा के लिये तमाम‌ कदम उठाए….यह सही भी था। लेकिन इसका दूसरा पक्ष भी है जिसने सभी को परेशान ,चिंतित किया है।
आन लाईन पढाई के लिये बच्चों को एंड्रॉयड फोन, लैपटॉप, टेबलेट पकड़ा दिये गये। बच्चों में बढती आन लाईन गैमिंग की लत और खेल मैदानों से बढती दूरी उन्हे शारीरिक – मानसिक रुप से कमजोर बना रही है। नौकरी पेशा अभिभावकों और घरों से आठ- दस घंटे बाहर रहने वाले अभिभावकों के बच्चों में मोबाइल एडिक्शन बढ रहा है। यह किसी घातक नशे की तरह , घुन की तरह नई पीढी को खोखला बना रही है। उनकी कल्पनाशीलता, उनकी क्रियात्मकता, पुस्तकें पढने , कहानियाँ सुनने – पढने, गीत गाने, अभिनय , नृत्य, समाजसेवा और आओ करके सीखें जैसी गतिविधियाँ शून्य हो गयी हैं। बच्चे नाना – नानी , दादा – दादी, माता – पिता , बड़े भाई बहन, चाचा – चाची या हम उम्र मित्रों के बीच रहने की जगह एकाकी रहना ,मोबाईल में सीमित रहना ही पसंद कर रहे हैं।
इसके कारण उनमें दृष्टि दोष, न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के साथ सिर दर्द, उल्टी जैसी तमाम परेशानियाँ हो रही हैं । यह कहानी घर – घर की है।
कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच बहुत से राज्यों में विद्यालय खोल दिये गये है। छात्र – छात्राओं को विद्यालय भेजने के लिये अभिभावकों की लिखित सहमति ली जा रही है। छात्रों को टिफिन साथ लाने की अनुमति नहीं है जबकि मास्क, सेनेटाइजर, सोशल डिस्टेंशिंग को अनिवार्य किया गया है। विद्यालय और कक्षाओं को विद्यालय प्रबंधन प्रतिदिन सेनेटाइज करेगा या नहीं, सोशल डिस्टेंशिंग कक्षा के अलावा विद्यालय परिसर में कैसे बनाए रखेगें यह स्पष्ट नहीं है। केन्द्रीय विद्यालय अनूपपुर की प्रचार्य पर अभिभावकों से सही लहजे और सही तौर तरीके से व्यवहार ना करने, उन्हे पेशागत टिप्पणियाँ करने के आरोप भी सामने आए हैं । विद्यालय प्रबंधन को अभिभावकों की परेशानियों को समझना होगा। जिस तरह से विद्यालय प्रबंधन कार्य और अपनी आमदनी बढाने को चिंतित हैं, अभिभावकों में बच्चों को घर और विद्यालय में स्वस्थ रखने, उनकी पढाई सुचारू जारी रखने और बढते खर्चों की चिंता से दो – चार होना पड रहा है। विद्यालय खुलें, कक्षाएं लगें यह सभी चाहते हैं लेकिन यह भी जरुरी है कि विद्यालय जाने वाले बच्चे स्वस्थ भी रहें । यह सुनिश्चित करना विद्यालय प्रबंधन का दायित्व है कि विद्यालय भवन समय समय पर सेनेटाइज होता रहे, बच्चों में पर्याप्त शारीरिक दूरी बनी रहे और सभी लोग मास्क का उपयोग करते रहें। विद्यालयों के प्राचार्य , स्टाफ के अन्य लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए अभिभावकों के सभी प्रश्नों , उनकी शंकाओं – आशंकाओं का समुचित तरीके से ,बिना चिडचिडाए जवाब देना सीखना होगा। ध्यान रहे कि कोरोना संक्रमण का खतरा अभी टला नहीं है । किसी भी विद्यालय की लापरवाही से बच्चों के संक्रमित होने ,सामूहिक बीमार पडने की दशा में उसका कुप्रभाव सभी विद्यालयों पर जरुर पड़ेगा ।

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