दुकान कब्जे मामले पर सीसीटीवी फुटेज के सामने आते ही मामले में आया नया मोड़, पुलिस की कार्यवाही पर उठ रहे सवाल।

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(ब्यूरो रिपोर्ट बिलासपुर)

 

दुकान कब्जे मामले पर सीसीटीवी फुटेज के सामने आते ही मामले में आया नया मोड़, पुलिस की कार्यवाही पर उठ रहे सवाल।

बिलासपुर: सीसीटीवी फुटेज के सामने आते ही पुलिस की कार्यवाही पर अब सवाल उठने लगे है। जबकि इस पूरे मामले में 5 आरोपी को जेल भी भेजा जा चुका है। जबकि सीसीटीवी फुटेज कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

मंगलवार को हुए दो गुटों के विवाद पर पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ की कार्यवाही। कब्जा खाली कराने को लेकर था पूरा मामला। ज्ञात हो कि बीते दिनों हुए दो पक्षों के विवाद पर थाना तारबाहर में एमएलसी रिपोर्ट आने पर गैरजमानती धाराओं के साथ के साथ मामला पंजीबद्ध कर छ लोगो के खिलाफ कार्यवाही की है।

इस पूरे मामले में पुलिस की कार्यवाही पर सवालिया निशान उठ रहे हैं कि दुकान मालिक के ऊपर ही 452 गैरजमानती धारा लगा दी गई, जबकि सीसीटीवी फुटेज के 10वे सेकेंड में साफ नजर आ रहा हैं कि अचानक से दूसरी पक्ष गाड़ी पर तोड़फोड़ सुरु कर देती है जब बीचबचाव करने अभय आता है तो उसको लोहे के किसी औजार से सर पर बेरहमी से वॉर किया जाता है जिससे वह घायल हो जाता है। सूचना पर पुलिस की टीम मौके पर पहुंच कर घायल अभय बरुवा को आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया, वहीं उनकी गाड़ी में भी जमकर तोड़फोड़ किया गया था। एक ही पार्टी के दोनों पक्षों के लोगों द्वारा थाने में रात का घेराव किया गया था।

मारपीट मामले में पुलिस ने दोनो पक्षों में शहनवाज खान,ईस्माइल खान व सोहराब खान तो वही दूसरे पक्ष से शिवा नायडू, रिषी कश्यप सहित कुल 5 लोगो को अब तक गिरफ्तार कर न्यायालय समक्ष पेश किया गया है।

इस पूरे मामले में संतुलन बनाने की ऐसी क्या जरूरत पड़ी, जो तारबाहर पुलिस ने इस फुटेज को भी नकार दिया गया, जबकि वारदात की सीसीटीवी उपलब्ध रही, और सारी कहानी साफ साफ नजर आ रही है। बहरहाल इस पूरे मामले में पुलिस पूरी तरह घिरती नजर आ रही है,, साथ ही पूरे मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। वही पुलिस को अब कोर्ट में घसीटने की तैयारी कर ली है।

सुलगते सवाल??

1- सीसीटीवी की मदद FIR से पहले क्यों नही देखी गई।

2- कब्जा लेने गये पक्ष पर भी fir क्यों दर्ज की गई।

3- तारबाहर पुलिस को संतुलन बनाने की जरूरत क्यों पड़ी।

4- डिवाइडर के इधर कोई भी मारपीट करने अभय और उनके साथियों से नही आया क्यों।

5- क्या उनकी रणनीति पहले ही तय थी, कहा से कहा तक तारबाहर और कहा तक सिविल लाइन थाना की हद है।

6- क्या तारबाहर थाना को पहले से इस मामले की भनक थी।

7- बड़ी संख्या में मारने वाले थे फिर भी तीन के खिलाफ ही fir दर्ज क्यों कि गई।

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