*जेहादी मानसिकता के कारण पश्चिम बंगाल में हो रही हिंसा से लोगों में नाराजगी* *प्रबुद्धजन नागरिक मंच ने राष्ट्रपति के नाम सौंपा कलेक्टर को पत्र*

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*अनूपपुर / पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले और बाद में जिस तरह से एक वर्ग विशेष के विरुद्ध लक्षित हिंसा हो रही है , उसके कारण लोगों में व्यापक नाराजगी है। चुनाव बाद हुए जेहादी ,साम्प्रदायिक हिंसा के विरुद्ध केन्द्रीय एजेंसी से जांच की मांग को लेकर अनूपपुर जिले के प्रबुद्धजन नागरिक मंच के लोगों ने 7 जून, सोमवार को सुरेन्द्र भदौरिया के नेतृत्व में कलेक्टर सुश्री सोनिया मीणा को पत्र सौंपा ।*
महामहिम राष्ट्रपति महोदय के नाम जिलाधीश ,अनूपपुर को सौंपे गये पत्र में कहा गया है कि
1 — विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में स्वतंत्रता के पूर्व से ही निर्वाचन होकर जनप्रतिनिधियों तथा सरकारों का चयन होता रहा है । राजनैतिक मतभेद , आरोप प्रत्यारोपित , रैलियाँ , सभाएं सब एक स्वस्थ परंपरा के अनुरूप होती रही हैं । विगत 70 वर्षों में केन्द्र से लेकर राज्य , ग्राम पंचायतों तक के चुनाव कुछ अपवादों को छोड़कर शांतिपूर्ण ही रहे हैं ।
2 –अपवादों में केरल , बिहार व पश्चिम बंगाल विशेष उल्लेखनीय रहे हैं जहाँ चुनाव से पूर्व , चुनाव के दौरान व बाद तक राजनीतिक हिंसा का इतिहास रहा है ।
3 — वर्तमान परिप्रेक्ष्य में पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान तथा उपरांत हुई हिंसा ने पिछले सभी प्रतिमानों को ध्वस्त करते हुए एक भयावह रूप ग्रहण कर लिया है । 4 — चुनाव परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद आरम्भ हुई यह हिंसा अबतक निरंतर जारी है । पहले सप्ताह में ही 3000 से अधिक गांवों में हिंसक घटनाएं हुई हैं । जिनमें 70,000 लोग प्रभावित हुए हैं । 3886 मकान , दुकान को क्षति पहुंची है । अनेक मकान तो बुलडोजर से ध्वस्त कर दिये गये ।
5 — तृणमूल कांग्रेस के जेहादी गुण्डों ने 39 महिलाओं के साथ दुष्कर्म किया , इनमें से केवल 4 के साथ बलात्कार की पुष्टि हो पाई है क्योंकि शेष की पुलिस ने मैडिकल जांच कराने से ही इंकार कर दिया है ।
हैं ।
6 — केवल सत्ताधारी पार्टी के विरोध में काम करने के अपराध में 2157 कार्यकर्ताओं पर हमले हुए कार्यकर्ताओं के 692 परिजनों पर भी प्राणघातक हमले हुए हैं । 23 की हत्या अब तक दर्ज हुई है । इनमें से 11 एकदम निर्धन तथा अनुसूचित जाति जनजाति के हैं व 3 महिलाएं हैं । 7 — अपने व परिवार की सुरक्षा के लिए 6779 कार्यकर्ता अभी बंगाल में ही अपना गांव व घर छोड़ कर शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं । 1800 से अधिक कार्यकर्ता आसाम में शरण लेने को विवश हुए हैं ।
*8 — इस सब घटनाओं में सबसे दुखद व चिंताजनक है* *क ) इसका लक्षित व साम्प्रदायिक स्वरूप : बंगाल की इन घटनाओं में हुई इस हिंसा के पीछे केवल राजनैतिक पक्ष विपक्ष ही एकमात्र कारण नहीं है । हिंसक भीड़ द्वारा लगाये गये साम्प्रदायिक नारों से इन हमलों की प्रकृति एकदम स्पष्ट हो जाती है । जनसंख्या असंतुलन और जेहादी मानसिकता के कारण उपजी अलगाववादी मानसिकता व वृहद बांग्लादेश जैसी देश विरोधी सोच इसके मूल में स्पष्ट दिखाई देती है । बांग्लादेशी घुसपैठियों व रोहिंग्या शरणार्थियों की सक्रियता खतरनाक भविष्य की ओर संकेत कर रहे हैं ।* *ख ) हिंसा को सत्ता धारी दल व प्रशासन का समर्थन : चुनाव के दौरान ही अनेक घटनाओं में प्रशासन व पुलिस का पक्षपाती रवैया स्पष्ट ही दिखाई दे रहा था । किंतु परिणाम घोषित होने के बाद जेहादी भीड़ के द्वारा हो रही हिंसक हमलों पर पुलिस प्रशासन मूक दर्शक बन कर देखता रहा । घटनाओं की एफ आई आर दर्ज करने में आनाकानी करता रहा । फरियादी का मेडिकल कराने से साफ इंकार कर दिया ।*
9 — देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी राज्य के राज्यपाल को स्वयं जनता के बीच जाकर उनकी पीड़ा सुननेकी आवश्यकता पड़ी हो । यही नहीं राज्यपाल महोदय को ही स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के असहयोग व रोकटोक का सामना करना पड़ा हो ।
*उपरोक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हम आपसे निवेदन करते हैं कि भारत की अखण्डता व सम्प्रभुता खतरे में डालने वाले इस घटनाक्रम पर स्वतः संज्ञान में लें । इस ज्ञापन के माध्यम से आपसे यह निवेदन करते हैं कि ( क ) आप पश्चिम बंगाल के राज्यपाल को अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत निर्देशित करें कि वह राज्य सरकार को पीड़ित लोगों की भावनाओं से अवगत करावे । ख ) राज्यपाल अपने संवैधानिक अधिकार का उपयोग कर प्रदेश सरकार को निर्देशित करें कि वह दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही करें । प्रभावित लोगों को शीघ्र न्याय दिलवाने के कार्य के साथ उचित मुआवजे की भी व्यवस्था करे । साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो इस हेतु शीघ्र कठोर कदम उठाएं । ग ) हिंसा की सभी घटनाओं की केन्द्रीय एजेंसी अथवा न्यायिक जांच हो । दोषियों तथा घटनाओं के पीछे लगी षड्यंत्रकारी शक्तियों , संगठनों तथा व्यक्तियों की पहचान कर उन पर प्रकरण दर्ज किये जायें ।* हम अधो हस्ताक्षरकर्ता इस ज्ञापन के माध्यम से अपनी यह भावना व्यक्त करते हैं कि कोई भी व्यक्ति , सम्प्रदाय या राज्य देश के संविधान से ऊपर नहीं है । साथ ही यह भी अपेक्षा करते हैं कि संविधान की मूल भावनाओं तथा देश की अखण्डता व सम्प्रभुता को खतरे में डालने वाले किसी भी कृत्य को कठोरता के साथ रोका जाये ।

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