कोरोना की इस जंग में लड़ रहे अदृश्य योद्धाओं को मेरा सलाम- आईजी डांगी

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कोरोना की इस जंग में लड़ रहे अदृश्य योद्धाओं को मेरा सलाम-  आईजी डांगी।

कोरोना के इस जंग में एक वर्ग ऐसा भी है जिसकी तरफ बहुत ही कम लोगों का ध्यान जाता है , वह है *सफाई कर्मचारी ,एंबुलेंस के ड्राइवर, श्मशान घाटों पर दिन रात मृत संक्रमित लोगों के दाह संस्कार के लिए तैनात कर्मचारी।* यह वो लोग हैं जो फ्रंट लाइन में काम करते हैं। आपको यह लोग सड़क पर ,अस्पताल में , श्मशान घाट पर एवम् एंबुलेंस के पास , हॉस्पिटल के गेट पर काम करते मिल जाएंगे । यह वो लोग हैं जिनका सीधा सामना कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों से होता है। अस्पताल में चाहे डॉक्टर हो या नर्सिंग स्टाफ सभी लोग कोरोना से बचने के सभी उपाय जैसे पीपीपी कीट ,मास्क,दस्ताने पहने रहते हैं लेकिन हम देखते हैं कि जो हमारे सफाई कर्मचारी ,एंबुलेंस के ड्राइवर हैं जिनके पास इस तरह के सुरक्षात्मक संसाधन नहीं होने के बावजूद प्रथम पंक्ति में खड़े होकर के अपनी जान को जोखिम में डालकर दिन रात काम करते हैं उसी प्रकार हम देखते है श्मशान घाट पर शवदाह करने वाले कर्मचारी ऐसे लोग हैं जो बिना भय के निडर होकर ऐसे शवों का दाह संस्कार करते है जिनको उनके परिजनों द्वारा एक तरह से लावारिस छोड़कर चले जाते हैं।उनकी तरफ बहुत ही कम लोगों का ध्यान जाता है यह ऐसे सैनिक है जो दिखाई तो हर जगह देते हैं लेकिन उनको जितना महत्व और सम्मान मिलना चाहिए वह नहीं मिल पाया । अपने जीवन को संकट में डाल कर सीमित सुरक्षात्मक संसाधनों  के अपने कार्य में जुटे रहते हैं।
इन कर्मियों की तरफ किसी का ध्यान मुश्किल ही जाता है।

यह लोग साधारण से मास्क लगाकर गंभीर परिस्थिति में भी कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के आस पास रहकर उनका ध्यान रखते हैं । कोरोना संक्रमित की  मृत्यु होने पर जब परिवार के सदस्य भी उनके हाथ लगाने से डरते हैं तब यही सफाई कर्मी शव को एंबुलेंस में रखते हैं , उनका अंतिम संस्कार के लिए भी सब लेकर जाते हैं । ये कर्मचारी बिना डरे सुबह से शाम तक लगे रहते हैं। कोरोना से संक्रमित होने से बचाने हेतु सुरक्षा के संसाधन के साथ-साथ उसे समाज में सम्मान और सहयोग भी मिलना चाहिए । सफाई कर्मी हम सभी के स्वास्थ्य के आधार स्तंभ हैं । हमारे स्वास्थ्य के लिए हर क्षेत्र को स्वच्छ बनाने के लिए दिन रात लगे रहते हैं । लेकिन विडंबना यह है कि हमारा आधुनिक समाज उनको वो सम्मानजनक स्थान नहीं देता जिसका वो  हकदार हैं। हम सबका दायित्व है कि उनके प्रति श्रद्धा रखकर उनका मनोबल बढ़ाना चाहिए । उनके साथ सम्मान जनक व्यवहार  हमको करना चाहिए।
इस संकट में ये कर्मचारी जो काम कर रहे है वो सराहनीय है।

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